" मेरी किस्मत मे यूँ ही था "
मेरा तो हाल होना आपकी सोहबत मे यूँ ही था, मुझे शिकवा नहीं तुमसे मेरी किस्मत मे यूँ ही था... .. जाने-जहाँ कहां रकीब को,उनका लहजा यूहीं था, हमें देके बोसा माथे पे,कभी उसने कहा यूँ ही था... .. गनीमत है तुम आये,वर्ना मरना मेरा यहां यूँ ही था, फ़क़त उन्होंने छोड़ा,दिल का कहना भी यूँ हीं था.. .. फ़रहाद-ओ-क़ैस होके, बदनाम हो जाना यूँ ही था, वो माशूक-फरेबी है,लाजमी उसका होना यूँ ही था... .. ये दर्द,जख्म,धोखा,देना,बस यही इश्क़ मे यूँ ही था पलकों पे रखा जहर को,तो हश्र फिर होना यूँ ही था...