" तुम मुझे जीना सीखा जाते.. "

जाना.. 
मैं तुम्हे कुछ बताना चाहता हूँ, कुछ बातें है जो सिर्फ तुम्हे बता सकता हूँ... हाँ ये पता है मुझे तुम मुझे छोड़ कर चले गये हो.. पर ये दिल मानता नहीं है.. आज भी.. 
पता है तुम्हे, वो तेरे साथ ली गयीं सेल्फी, आज भी है मेरे फ़ोन मे, हाँ आज भी मैं देखता हूँ.. वो पल याद आ जाता है, जब हम दोनों साथ मे बचकानी हरकतें करते थे.. और फालतू वाली सेल्फीयां लेते रहते थे.. वो अजीब तरीके के मुँह बनाना कितना फनी लगता था.. 

पर जाना..
आज जब वो पिक्स देखता हूँ.. तो एक मुस्कुराहट आ जाती है चेहरे पे... और कुछ पल मे ही वो अश्रुओ मे बदल जाती है.. 
हाँ मैं स्ट्रांग था,आज भी हूँ... पर कहते है ना.. ये तो आँशु है सुनते कहा है.. इन्हे पता क्या है.. ये तो बस निकल आते है...  
  
पता है जाना..
तुम्हारे जाने के बाद, मैं कैसा हूँ तुम्हे पता है... हाँ होगा.. 
क्योंकि शयद इतना तो जाना ही होगा तुमने मुझे..  
मैं कभी रोता नहीं था... याद है ना तुम्हे.. 
तेरी तो आदत थीं वैसी भी छोटी-छोटी बता पे रो जाती थीं... मैं तुझे अश्रुओ की टंकी कहता था.. पर मेरी आँखो से कभी आशु नहीं निकलते थे.. है ना.. जब तक तुमसे नहीं मिला था... 

पता है जाना..
तुम चले गये... ठीक है ये तुम्हारा फैसला था, लेकिन तुम जो ये अश्रु देकर गये हो ना.. ये बहुत ज्यादती करते है मेरे साथ.. मेरी कभी भी मानते नहीं है.. कभी भी निकल जाते है... 
तेरे है ना... आदत है इनकी, तेरी बात पे, तेरी यादों मे, तेरी पुरानी तस्वीरों से,हर चीज़ से निकल आते है... 
पता है कई बार रात-रात-भर, ये मेरा पीछा नहीं छोड़ते है... 
जाना..
तुम्हे तो पता होगा ना ये कैसे थम सकते है.. ये कैसे मेरी बात मानेंगे... क्योंकि तुम रोना तो सीखा गये... पर जैसे तुम हस लेते हो.. सब से मिल लेते हो...और रह लेते हो..       
ये भी तो मुझे सीखा जाते.. सच जीना कभी-कभी बहुत मुश्किल-सा हो जाता है... और कमवख्त ये जो तेरी यादें होती है ना सच मुझे अंदर तक तोड़ जाती है.. आँखों मे सैलाब-सा फूट जाता है, मैं खुद को रोक नहीं पता.. पता नहीं क्यों अब ये मेरे साथ होता है... 
पर जाना..
जब भी तुम्हे वक़्त मिले तो प्लीज मुझे इसका उपाय बता जाना... प्लीज बस और कुछ नहीं चाहता हूँ अब मैं.... 

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