" वर्षा की फुहार " by kabir pankaj
कभी महसूस की हैं बारिश की बूंदों की फुहार, यकायक ही किसी की यादें छिड़क के गिर जाती है... मानो वो बादल उसका प्रतिरूप हो,बूंदे उसकी यादें, जो सीधा ह्रदय पर प्रहार करती है...हमें वहीं भेज देती है... और जैसे ही वो फुहारे बड़ी बूंदों मे तब्दील होती है, एक अथाय स्मृतियों कर पिटारा खुल जाता है... मेघो मे उसका चेहरा उभर आता है, घनघोर घटा भी उसकी आँखों का काजल-सा प्रतीत होता है.. और मन ही मन प्रश्नचित हो,ह्रदय उल्लास से भर जाता है... वर्षा का आगमन,मुझे तुम्हारे आगमन-सा लगता हैं, जैसे वर्षा के आने पर सब जीव-जन्तु,व्रक्ष-लताये खिल जाती हैं,और चारों तरफ सुंदरता ही फैली दिखती हैं... वैसे ही तुम्हारे आगमन से ये ह्रदय प्रफुल्लित हो,पुष्प की तरहा खिल उठता है..और अनन्त प्रेम संवेदनाओ का घर हो जाता है...