Posts

Showing posts from June, 2020

" वर्षा की फुहार " by kabir pankaj

कभी महसूस की हैं बारिश की बूंदों की फुहार,  यकायक ही किसी की यादें छिड़क के गिर जाती है... मानो वो बादल उसका प्रतिरूप हो,बूंदे उसकी यादें,  जो सीधा ह्रदय पर प्रहार करती है...हमें वहीं भेज देती है... और जैसे ही वो फुहारे बड़ी बूंदों मे तब्दील होती है,  एक अथाय स्मृतियों कर पिटारा खुल जाता है... मेघो मे उसका चेहरा उभर आता है, घनघोर घटा भी उसकी आँखों का काजल-सा प्रतीत होता है.. और मन ही मन प्रश्नचित हो,ह्रदय उल्लास से भर जाता है... वर्षा का आगमन,मुझे तुम्हारे आगमन-सा लगता हैं,  जैसे वर्षा के आने पर सब जीव-जन्तु,व्रक्ष-लताये खिल जाती हैं,और चारों तरफ सुंदरता ही फैली दिखती हैं... वैसे ही तुम्हारे आगमन से ये ह्रदय प्रफुल्लित हो,पुष्प की तरहा खिल उठता है..और अनन्त प्रेम संवेदनाओ का घर हो जाता है...

" तुम मुझे जीना सीखा जाते.. "

जाना..  मैं तुम्हे कुछ बताना चाहता हूँ, कुछ बातें है जो सिर्फ तुम्हे बता सकता हूँ... हाँ ये पता है मुझे तुम मुझे छोड़ कर चले गये हो.. पर ये दिल मानता नहीं है.. आज भी..  पता है तुम्हे, वो तेरे साथ ली गयीं सेल्फी, आज भी है मेरे फ़ोन मे, हाँ आज भी मैं देखता हूँ.. वो पल याद आ जाता है, जब हम दोनों साथ मे बचकानी हरकतें करते थे.. और फालतू वाली सेल्फीयां लेते रहते थे.. वो अजीब तरीके के मुँह बनाना कितना फनी लगता था..  पर जाना.. आज जब वो पिक्स देखता हूँ.. तो एक मुस्कुराहट आ जाती है चेहरे पे... और कुछ पल मे ही वो अश्रुओ मे बदल जाती है..  हाँ मैं स्ट्रांग था,आज भी हूँ... पर कहते है ना.. ये तो आँशु है सुनते कहा है.. इन्हे पता क्या है.. ये तो बस निकल आते है...      पता है जाना.. तुम्हारे जाने के बाद, मैं कैसा हूँ तुम्हे पता है... हाँ होगा..  क्योंकि शयद इतना तो जाना ही होगा तुमने मुझे..   मैं कभी रोता नहीं था... याद है ना तुम्हे..  तेरी तो आदत थीं वैसी भी छोटी-छोटी बता पे रो जाती थीं... मैं तुझे अश्रुओ की टंकी कहता था.. पर मेरी आँखो से कभी आशु...

" दर्द "

दर्द अगर इस बात का होता की,  उस रात मैं कितना रोया था,पर तुझे पता नहीं था.. तो शायद ये दर्द ख़त्म भी हो जाता.. लेकिन ज्यादा तकलीफ तो अब ये देता है... की तुझे पता था मैं कितना रोया था उस रात.. फिर भी तुमने मुझे फ़ोन नहीं किया...